Posted on February 16, 2008 by kulu1234
राज ठाकरे उसी रहगुज़र पर चल पड़े हैं जिस पर कभी उनके चाचा बाल ठाकरे चला करते थे. महाराष्ट्र में बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच राज ने पहचान पर आधारित अलगाववादी राजनीति का दांव खेला है. क्या हैं इसकी वजहें और क्या हो सकते हैं इसके नतीजे, बता रहे हैं अजित साही .
पिछले साल 27 [...]
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Posted on February 16, 2008 by kulu1234
आनंदवन में बिताए जीवन और बाबा आमटे के साहचर्य के गुनगुनेपन को जितना हो सके समेटने की कोशिश कर रहे हैं डॉक्टर प्रकाश आमटे…
जब हम आनंदवन में रहने के लिए आए तब मेरी उम्र केवल तीन साल थी। इसके पहले का मुझे कुछ याद नहीं। तब ये एक जंगली इलाका था। ये सोचना भी काफी [...]
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Posted on February 16, 2008 by kulu1234
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